शनिवार, 26 अगस्त 2017

कुछ उम्मीदें जो बची, आज वो भी टूट गई.
कुछ सपने जो सजाए थे, आज वो भी रूठ गई..
प्यार तो तुम्हें दिल अब भी बहुत करता है ग़ालिब
बस कुछ अपने जो कमाए थे आज वो अपने पीछे छूट गए
Rahul@vats 

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें

सदस्यता लें टिप्पणियाँ भेजें [Atom]

<< मुख्यपृष्ठ